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वैभव सूर्यवंशी: बिहार की गलियों से IPL के आसमान तक का सफर

Vaibhav Sooryavanshi IPL Journey Vaibhav Sooryavanshi Journey

Vaibhav Sooryavanshi IPL Journey : क्रिकेट की दुनिया में अक्सर ऐसी कहानियाँ सुनने को मिलती हैं जहाँ जुनून संसाधनों पर भारी पड़ जाता है। लेकिन बिहार के समस्तीपुर के एक छोटे से गाँव ताजपुर से निकलकर 14 साल की उम्र में आईपीएल (IPL) के मंच पर तहलका मचाने वाले वैभव सूर्यवंशी की कहानी कुछ अलग ही है। यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक पिता के अटूट विश्वास और एक गुरु के सटीक मार्गदर्शन की भी है।

साइकिल से शुरू हुआ सफर और जमीन बेचने का साहस

वैभव की कहानी आज की चमक-धमक वाली नहीं है। यह शुरू होती है समस्तीपुर से, जहाँ उनके पिता संजीव सूर्यवंशी कभी एक टूर्नामेंट का फॉर्म लेने के लिए 90 किलोमीटर साइकिल चलाकर पटना जाते थे। संजीव खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे, लेकिन संसाधन आड़े आ गए। जब उन्होंने अपने 8 साल के बेटे वैभव में वह आग देखी, तो उन्होंने ठान लिया कि जो कमी उनके जीवन में रही, वह वैभव के साथ नहीं होने देंगे।

वैभव की ट्रेनिंग के लिए संजीव ने कर्ज लिए और अपनी खेती की जमीन तक बेच दी। लोग कहते थे कि बिहार में क्रिकेट का क्या भविष्य है, लेकिन संजीव को अपने बेटे की मेहनत पर भरोसा था। सुबह 4 बजे उठना, समस्तीपुर से पटना की बस पकड़ना और फिर घंटों नेट पर वैभव को 500-500 गेंदें खेलते हुए देखना—यह संजीव की दिनचर्या बन गई थी।

कोच मनीष ओझा की ‘ग्रामर’ और रोबो आर्म का वह हैरान करने वाला दिन

जब वैभव पटना में कोच मनीष ओझा के पास पहुँचे, तो वे महज एक बच्चे थे। मनीष ओझा बताते हैं कि शुरुआत में वे डरते थे कि कहीं वैभव को तेज गेंद लग न जाए, इसलिए वे अंडरआर्म गेंदें फिंकवाते थे। लेकिन एक दिन उन्होंने ‘रोबो आर्म’ (Robo Arm) का इस्तेमाल किया और स्पीड 130-135 किमी/घंटा सेट कर दी।

ओझा जी कहते हैं, “मैं हैरान रह गया जब उस छोटे से बच्चे ने अचानक उस रफ्तार को एडजस्ट कर लिया।” वहीं से कोच को यकीन हो गया कि वैभव का टैलेंट साधारण नहीं है। कोच ने उन्हें क्रिकेट की ‘एबीसीडी’ से लेकर ‘ग्रामर’ (तकनीक) तक सब सिखाया। वैभव शांत रहते थे, बात कम करते थे, लेकिन जब कोच ने उन्हें संभलकर खेलने को कहा, तो वैभव का एक ही जवाब था— “जिस बॉल पर छक्का मार सकते हैं, उस पर सिंगल-डबल क्यों लें?”

गुजरात टाइटंस के खिलाफ वह ऐतिहासिक 38 गेंदों में शतक

आज की पारी से पहले ही वैभव ने आईपीएल जगत में तहलका मचा दिया था। उन्होंने गुजरात टाइटंस के खिलाफ खेलते हुए मात्र 38 गेंदों में 101 रन जड़ दिए थे। वह पारी किसी चमत्कार से कम नहीं थी। उस दिन दुनिया ने देखा कि एक 14-15 साल का लड़का दुनिया के दिग्गज गेंदबाजों की लाइन और लेंथ कैसे बिगाड़ सकता है। उस शतक ने वैभव को रातों-रात स्टार बना दिया, लेकिन उनके पैर आज भी जमीन पर हैं।

आज का कारनामा: RCB के खिलाफ 26 गेंदों में 78 रनों का तूफान

आज जब राजस्थान रॉयल्स के सामने 202 रनों का विशाल लक्ष्य था, तो सबको लगा कि बेंगलुरु यह मैच जीत जाएगी। लेकिन वैभव सूर्यवंशी के इरादे कुछ और ही थे। उन्होंने आते ही बेंगलुरु के गेंदबाजों पर धावा बोल दिया।

मात्र 26 गेंदों में 78 रन। स्ट्राइक रेट 300.00। 8 चौके और 7 गगनचुंबी छक्के। वैभव ने आज वह निडरता दिखाई जिसकी बात उनके कोच मनीष ओझा अक्सर करते हैं। उन्होंने पावरप्ले का ऐसा इस्तेमाल किया कि मैच का फैसला वहीं हो गया। यशस्वी जायसवाल के जल्दी आउट होने के बाद भी वैभव ने दबाव को अपने पास फटकने नहीं दिया।

संस्कारों की खुशबू: “पापा परनाम”

इतनी शोहरत मिलने के बाद भी वैभव की सादगी ने सबका दिल जीत लिया है। राजस्थान रॉयल्स के एक वीडियो में जब उनसे पूछा गया कि वे जीत के बाद किसे कॉल करेंगे, तो उनका जवाब सीधा था— “पापा को ही करूँगा।” जब फोन लगा, तो उनके मुँह से निकला— “पापा परनाम”

यह ‘परनाम’ (प्रणाम) शब्द बिहार की उस मिट्टी की खुशबू है जिसे वैभव अपने साथ समस्तीपुर की गलियों से लेकर दुनिया के आलीशान स्टेडियमों तक ले आए हैं। यह उन संघर्षों का सम्मान है जो उनके पिता ने साइकिल चलाकर और जमीन बेचकर किए थे।

भारतीय क्रिकेट का नया सितारा

वैभव सूर्यवंशी का सफर अभी शुरू हुआ है। 14 साल की उम्र में आईपीएल कॉन्ट्रैक्ट, पहली ही गेंद पर छक्का, गुजरात के खिलाफ 38 गेंदों में शतक और आज आरसीबी के खिलाफ यह विध्वंसक पारी—यह सब बताता है कि बिहार का यह लड़का रिकॉर्ड्स की नई इबारत लिखने आया है।

आज राजस्थान रॉयल्स ने 18 ओवरों में ही 6 विकेट से जीत हासिल कर ली, लेकिन इस जीत की नींव वैभव सूर्यवंशी ने ही रखी थी। मनीष ओझा की ट्रेनिंग और संजीव सूर्यवंशी के बलिदान का परिणाम आज पूरा देश देख रहा है।

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