भारत विविधताओं का देश है। यहाँ साल भर अनेक त्योहार मनाए जाते हैं, जिनमें हर त्योहार की अपनी विशेषता और महत्व होता है। इन्हीं पर्वों में से एक है नवरात्रि, जो पूरे भारतवर्ष में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।
नवरात्रि का अर्थ और महत्व
नवरात्रि’ शब्द का अर्थ है – नौ रातें। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है जो वर्ष में दो बार आता है – चैत्र मास और आश्विन मास में। इस पर्व में मां दुर्गा और उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि का उद्देश्य शक्ति की उपासना और साधना के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार करना है।
नवरात्रि की विशेषताएँ
नवरात्रि पूजा विधि में लोग व्रत रखते हैं, मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है और घर-घर में देवी के लिए दीपक जलाए जाते हैं। बंगाल और असम में इसे दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, वहीं गुजरात और महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया नृत्य इस पर्व की पहचान हैं। उत्तर भारत में भक्तजन माता के मंदिरों में भजन-कीर्तन और जगराते का आयोजन करते हैं |
देवी दुर्गा के नौ स्वरूप
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। प्रत्येक दिन देवी के एक स्वरूप की विशेष पूजा होती है –
शैलपुत्री – पर्वतराज हिमालय की पुत्री और शक्ति का प्रथम रूप।
ब्रह्मचारिणी – तपस्या और संयम की देवी।
चंद्रघंटा – शांति और वीरता की प्रतीक।
कूष्मांडा – ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री।
स्कंदमाता – कार्तिकेय की माता और मातृत्व की प्रतीक।
कात्यायनी – महिषासुर का वध करने वाली शक्ति।
कालरात्रि – अंधकार और बुराई का नाश करने वाली।
महागौरी – सौंदर्य और शांति की देवी।
सिद्धिदात्री – सिद्धियों और शक्तियों की दात्री।
इन नौ रूपों की आराधना से भक्तों को शक्ति, धैर्य, साहस और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
देवी दुर्गा से जुड़ी कथा
नवरात्रि 2025 पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी सती ने अपने पिता दक्ष के अपमान को सहन न कर अग्निकुंड में प्राण त्याग दिए थे। इसके बाद सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। कठोर तपस्या के बाद उन्होंने भगवान शिव को पुनः पति रूप में प्राप्त किया। नवरात्रि के दौरान इन्हीं घटनाओं और देवी की शक्ति का स्मरण किया जाता है।
एक अन्य कथा के अनुसार, नवरात्रि का पर्व देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर जैसे दानवों का वध करने की स्मृति में भी मनाया जाता है। देवी ने नौ रातों तक महिषासुर से युद्ध किया और दसवें दिन विजय प्राप्त की, जिसे विजयादशमी या दशहरा के रूप में मनाया जाता है।
इस पर्व से जुड़ी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सीख
नवरात्रि त्योहार का पर्व हमें यह शिक्षा देता है कि बुराई चाहे कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः अच्छाई की ही जीत होती है। यह पर्व शक्ति, साहस और संयम का प्रतीक है। साथ ही, यह समाज में एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम भी है।
शारदीय नवरात्रि 2025: कब से हो रही है शुरुआत?
दुर्गा पूजा हिंदू धर्म का एक प्रमुख पर्व है, जो शक्ति की उपासना को समर्पित है। साल 2025 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत सोमवार, 22 सितंबर 2025 से हो रही है और इसका समापन गुरुवार, 2 अक्टूबर 2025 को होगा। इन नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। कलश स्थापना और घटस्थापना का विशेष महत्व रहता है। भक्त उपवास रखते हैं, पूजा-अर्चना करते हैं और गरबा व दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक आयोजन होते हैं। नवरात्रि का हर दिन शक्ति की अलग ऊर्जा को समर्पित होता है और विजयादशमी के दिन रावण दहन के साथ यह पर्व संपन्न होता है।