दक्षिण अफ्रीका के सामने जिम्बाब्वे की चुनौती, युवा टीम के साथ उतरेगी कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट

South Africa Women vs Zimbabwe Women T20 Series : जिम्बाब्वे महिला क्रिकेट टीम के लिए दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आगामी टी20 सीरीज आसान नहीं होने वाली है। जिम्बाब्वे की टीम टी20 अंतरराष्ट्रीय में लगातार 12 मैच हार चुकी है और उसकी आखिरी जीत पिछले साल सितंबर में नामीबिया के खिलाफ आई थी। उस दौरे पर टीम ने युगांडा, नाइजीरिया और सिएरा लियोन को भी हराया था।

अब दोनों टीमों के बीच अगले महीने बुलावायो में पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले जाएंगे। कागज पर देखें तो यह दक्षिण अफ्रीका के लिए अपने प्रमुख खिलाड़ियों को आराम देने का अच्छा मौका लग सकता था, लेकिन कप्तान लौरा वोल्वार्ड्ट इस सीरीज से बाहर बैठने के लिए तैयार नहीं हैं।

हर मैच में देश के लिए खेलना चाहती हैं वोल्वार्ड्ट

दक्षिण अफ्रीका के मुख्य कोच मंडला माशिम्बयी ने बताया कि वोल्वार्ड्ट के लिए राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनना किसी भी आराम से ज्यादा महत्वपूर्ण है। इस साल वह अब तक 47 मैच खेल चुकी हैं और उनके कार्यक्रम को देखते हुए उन्हें आराम दिया जा सकता था।

माशिम्बयी ने कहा कि अगर कोई वोल्वार्ड्ट से दक्षिण अफ्रीका के लिए नहीं खेलने को कहेगा तो शायद यह आसान बातचीत नहीं होगी। उनके पास आराम चुनने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने हर बार देश के लिए खेलने की इच्छा जताई।

वोल्वार्ड्ट की मौजूदगी युवा खिलाड़ियों वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम के लिए भी काफी अहम होगी। वह कप्तान होने के साथ-साथ टीम की सबसे भरोसेमंद बल्लेबाजों में शामिल हैं।

कई अनुभवी खिलाड़ी सीरीज से बाहर

दक्षिण अफ्रीका इस सीरीज में अपनी पूरी ताकत के साथ नहीं उतर रहा है। मारिजाने कैप और डेन वैन नीकर्क के अलावा सुने लूस, नॉनकुलुलेको म्लाबा, ताजमिन ब्रिट्स, क्लो ट्रायन, नादिन डी क्लर्क, अयाबोंगा खाका और शबनिम इस्माइल भी टीम का हिस्सा नहीं होंगी।

इन नौ खिलाड़ियों के पास कुल मिलाकर 959 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों का अनुभव है। इसके मुकाबले जिम्बाब्वे दौरे पर जाने वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम के सभी खिलाड़ियों ने मिलकर 357 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। यानी अनुभव के मामले में इस बार टीम काफी युवा है।

वोल्वार्ड्ट पर होगी बड़ी जिम्मेदारी

दक्षिण अफ्रीकी टीम में वोल्वार्ड्ट के पास 104 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों का अनुभव है। उनके अलावा सिनालो जाफ्टा ने 73, एनेके बॉश ने 53 और एनेरी डर्कसन ने 42 मैच खेले हैं। इन चार खिलाड़ियों के अनुभव को जोड़ दें तो टीम के कुल अनुभव का बड़ा हिस्सा इन्हीं के पास है।

दूसरी ओर, टीम में तीन ऐसी खिलाड़ी भी हैं जिन्होंने अभी तक अपना टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू नहीं किया है। इनमें ऑफ स्पिनर लुयांडा नुजा और तेज गेंदबाज नथाबिसेंग निनी तथा कैटलिन वायनगार्ड शामिल हैं। अयांडा ह्लुबी, विकेटकीपर-बल्लेबाज कराबो मेसो और ऑलराउंडर मियाने स्मिट ने भी अभी 10 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच पूरे नहीं किए हैं।

युवा खिलाड़ियों को परखना है असली मकसद

माशिम्बयी इस युवा टीम को कमजोरी के बजाय एक अवसर के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि ऐसी टीम की कप्तानी करते हुए वोल्वार्ड्ट को भी अपने नेतृत्व को एक अलग तरीके से परखने का मौका मिलेगा।

कोच चाहते हैं कि कप्तान युवा खिलाड़ियों को मैदान पर निडर और आक्रामक क्रिकेट खेलने के लिए प्रेरित करें। इस सीरीज में परिणाम के साथ-साथ दक्षिण अफ्रीका की नजर इस बात पर भी रहेगी कि युवा खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर के दबाव में खुद को किस तरह संभालते हैं।

इसका सीधा संबंध दक्षिण अफ्रीका के लंबे भविष्य से है। माशिम्बयी के मुताबिक टीम की योजना में 2029 वनडे विश्व कप पहले से मौजूद है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का अनुभव देना जरूरी है, ताकि यह पता चल सके कि कौन खिलाड़ी बड़े मंच पर दबाव झेलते हुए अच्छा प्रदर्शन कर सकता है।

दक्षिण अफ्रीका पूरे अफ्रीका में क्रिकेट मजबूत करना चाहता है

इस सीरीज का महत्व सिर्फ दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे के बीच मुकाबले तक सीमित नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के पुरुष टीम के कोच शुक्री कॉनराड भी हाल ही में कह चुके हैं कि महाद्वीप की बड़ी क्रिकेट टीम होने के नाते दक्षिण अफ्रीका की जिम्मेदारी है कि वह अफ्रीका में क्रिकेट के विकास में मदद करे।

माशिम्बयी भी इस सोच से सहमत नजर आए। उनका कहना है कि दक्षिण अफ्रीका ने विश्व क्रिकेट में अपनी जगह मजबूत की है, लेकिन अगर पूरे अफ्रीकी महाद्वीप की क्रिकेट बेहतर होगी तो इससे दक्षिण अफ्रीका भी मजबूत होगा।

जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका निश्चित रूप से पसंदीदा रहेगा। जिम्बाब्वे ने अब तक किसी भी आईसीसी पूर्ण सदस्य देश के खिलाफ खेले अपने 16 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं जीते हैं। हालांकि, एक दिलचस्प बात यह भी है कि जिम्बाब्वे ने अभी तक दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेला ही नहीं है।

यही वजह है कि कागज पर मुकाबला एकतरफा नजर आने के बावजूद जिम्बाब्वे के लिए यह सीरीज खुद को साबित करने का अच्छा मौका होगी। दूसरी तरफ दक्षिण अफ्रीका के लिए चुनौती सिर्फ जीत हासिल करना नहीं, बल्कि अपनी युवा खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के लिए तैयार करना भी है।

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