2027 विश्व कप से पता चलेगा कि अफ्रीका में टी20 क्रांति का क्रिकेट पर कितना असर पड़ा

2027 World Cup Africa T20 revolution : 2003 में जब ऑस्ट्रेलिया ने वांडरर्स में भारत को हराकर पुरुष विश्व कप का खिताब जीता था, तब क्रिकेट में टी20 का दौर शुरू होने में अभी करीब तीन महीने बाकी थे। उस समय दस काउंटी टीमों ने ओवल, वॉर्सेस्टर, टॉन्टन, साउथेम्प्टन और चेस्टर-ले-स्ट्रीट में एक ऐसी प्रतियोगिता की शुरुआत की थी, जिसका नाम आज काफी पुराना लगता है- ट्वेंटी20 कप।

उस समय रिकी पोंटिंग की 140 रन की शानदार पारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 125 रन से हराया था। लेकिन क्रिकेट को अपना पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला देखने के लिए अभी करीब 14 महीने और इंतजार करना था। अगस्त 2004 में इंग्लैंड और न्यूजीलैंड की महिला टीमों के बीच पहला टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला गया। पुरुषों की टीमें इसके छह महीने बाद इस प्रारूप में उतरीं।

जब पहली बार टी20 मुकाबले खेले जा रहे थे, तब क्रिकेट को आईपीएल तक पहुंचने में अभी करीब पांच साल बाकी थे। 18 अप्रैल 2008 को बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में आईपीएल के पहले मुकाबले की पहली गेंद फेंकी गई। उस समय शायद ही किसी ने सोचा होगा कि टी20 आने वाले वर्षों में क्रिकेट के सबसे प्रभावशाली प्रारूपों में से एक बन जाएगा।

आज उस ऐतिहासिक शुरुआत को 18 साल से ज्यादा हो चुके हैं। क्रिकेट काफी बदल चुका है और टी20 भी अब अकेला छोटा प्रारूप नहीं है। टी10 और द हंड्रेड जैसे प्रारूपों ने भी अपनी जगह बना ली है।

रबाडा और अमला ने बताया कितना बदला क्रिकेट

दक्षिण अफ्रीका के तेज गेंदबाज कगिसो रबाडा 2003 विश्व कप के समय सिर्फ आठ साल के थे। उनका पूरा करियर क्रिकेट में हुए इस बड़े बदलाव के दौर में आगे बढ़ा है। अगले साल होने वाला 2027 विश्व कप दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में खेला जाएगा। अगर रबाडा अपनी टीम को घरेलू मैदान पर विश्व कप जिताने में सफल होते हैं तो वह उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल होगी।

रबाडा के अनुसार क्रिकेट में सबसे बड़ा बदलाव दर्शकों और खिलाड़ियों की विविधता में आया है। अब अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग क्रिकेट खेल रहे हैं और इसे पसंद कर रहे हैं। खेल में पैसा बढ़ा है और पहले की तुलना में ज्यादा टीमें भी हिस्सा ले रही हैं।

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व महान बल्लेबाज हाशिम अमला ने भी माना कि क्रिकेट काफी बदल गया है। उनके मुताबिक खेल पहले की तुलना में काफी तेज हो गया है।

आंकड़े भी एकदिवसीय क्रिकेट में आए बदलाव की कहानी बताते हैं। इस साल 13 अगस्त तक खेले गए 68 पुरुष एकदिवसीय मुकाबलों में 33 शतक बने हैं। वहीं पूरे 2003 में 147 मुकाबलों में 58 शतक बने थे। अगर इस साल शतकों की मौजूदा गति बनी रहती है तो 147 मुकाबलों में यह आंकड़ा करीब 71 तक पहुंच सकता है।

अमला का मानना है कि अगले साल विश्व कप में गेंदबाजों को भी कुछ मदद मिलनी चाहिए, ताकि मुकाबले ज्यादा करीबी और रोमांचक बन सकें।

दक्षिण अफ्रीका के पास घरेलू मैदान पर इतिहास बदलने का मौका

दक्षिण अफ्रीका का विश्व कप इतिहास निराशाजनक रहा है। टीम अब तक किसी भी पुरुष विश्व कप में खिताब नहीं जीत सकी है। टी20 विश्व कप में भी उसे सफलता नहीं मिली। 2024 में बारबाडोस में भारत के खिलाफ फाइनल में दक्षिण अफ्रीका सिर्फ सात रन से खिताब से चूक गया था।

इसके बावजूद अमला को अगले साल की टीम से काफी उम्मीदें हैं। उनका मानना है कि दक्षिण अफ्रीका की टेस्ट टीम विश्व चैंपियन रह चुकी है, टी20 विश्व कप जीतने के बेहद करीब पहुंच चुकी है और एकदिवसीय विश्व कप में भी टीम मजबूत है। ऐसे में घरेलू मैदान पर होने वाला 2027 विश्व कप दक्षिण अफ्रीका के लिए इतिहास बदलने का बड़ा अवसर हो सकता है।

रबाडा चाहते हैं कि विश्व कप के दौरान आने वाले प्रशंसक सिर्फ क्रिकेट का आनंद न लें, बल्कि दक्षिण अफ्रीका को भी करीब से देखें। उनके मुताबिक देश में केपटाउन के अलावा भी घूमने और देखने के लिए बहुत कुछ है।

2027 विश्व कप जिम्बाब्वे और नामीबिया के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण होगा। 2003 में नामीबिया ने पहली बार विश्व कप में हिस्सा लिया था। तब से अफ्रीकी क्रिकेट में काफी बदलाव आया है, लेकिन विश्व कप के स्तर पर महाद्वीप को अभी भी बड़ी सफलता का इंतजार है।

अगले साल दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होने वाला विश्व कप यह बताने का बड़ा मौका होगा कि पिछले दो दशकों में टी20, टी10 और द हंड्रेड जैसे तेज प्रारूपों ने अफ्रीकी क्रिकेट को कितना बदला है। यह टूर्नामेंट सिर्फ विश्व चैंपियन तय नहीं करेगा, बल्कि अफ्रीका में क्रिकेट की बदलती तस्वीर का भी आईना बनेगा।

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